पश्चिम बंगाल में एसआईआर : न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत न करें – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत न करें।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कान्त और न्यायाधीश जॉयमल्य बागची की पीठ एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने मतदाता सूचियों से नाम कटने के मामले में जांच के लिए न्यायिक अधिकारियों के समक्ष लंबित दावों के मामले में एक आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने यह फटकार लगाई।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कान्त ने कहा, हमें बताया गया है कि 10 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है। उन्‍होंने कहा कि आज सुबह ही हमें यह जानकारी दी गई है।

मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि ऐसे आवेदन दाखिल करने की हिम्मत कैसे हुई? साथ ही उन्‍होंने कहा कि कोई भी न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं करे, मैं इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूंग। इस पर वरिष्ठ वकील गुरुस्वामी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार न्यायिक अधिकारियों पर सवाल नहीं उठा रही है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को इस काम के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें झारखंड सहित अन्य राज्यों के अधिकारी भी शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अदालत को विश्वास है कि न्यायिक अधिकारी अपना काम ठीक से कर रहे हैं, लेकिन अतिरिक्त सावधानी के तौर पर राज्य सरकार को निर्देश दिया जाता है कि वह न्यायिक अधिकारियों के काम के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए।

अदालत को यह भी बताया गया कि पूरी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी हाईकोर्ट के आधिकारिक टेलीग्राम ग्रुप पर रियल-टाइम में साझा की जा रही है। इसके बाद अदालत ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी अनिवार्य कदम ऐसा न उठाया जाए जो इस प्रक्रिया को बाधित करे, जब तक कि उसे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति न मिल जाए।

पोर्टल में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आगे ऐसी बाधाएं न आएं। आवश्यकतानुसार नए लॉग-इन आईडी तुरंत बनाए जाएं। ताकि अधिकारी बिना रुकावट काम कर सकें। अदालत ने अपील की व्यवस्था पर भी स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारी के फैसले के खिलाफ किसी प्रशासनिक निकाय के समक्ष अपील नहीं होगी।

इसके बजाय संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दो पूर्व हाईकोर्ट जज या मौजूदा हाईकोर्ट जजों की बेंच गठित कर सकते हैं, जो इन अपीलों पर सुनवाई करेगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस अपील तंत्र को लेकर चुनाव आयोग आधिकारिक अधिसूचना जारी करे।

(जनचौक ब्यूरो)

Leave a Reply